कल की हसीन चाह में
कल की हसीन चाह में, आज गंवाते चले गए,
हम ज़िंदगी के मायने, भुलाते चले गए!

झूठी सी ख्वाहिशों का बोझा, सर पे रख लिया,
खुद अपना ही वजूद, मिटाते चले गए!

कागज़ के चंद टुकड़ों को, कमाते चले गए,
रिश्तों की नाज़ुक डोर को, उलझाते चले गए!

कल की इसी तलाश में हमने, सुकूं खो दिया,
ख़ुद अपनी ही ख़ुशी को हम, जलाते चले गए!
कल की हसीन चाह में कल की हसीन चाह में, आज गंवाते चले गए, हम ज़िंदगी के मायने, भुलाते चले गए! झूठी सी ख्वाहिशों का बोझा, सर पे रख लिया, खुद अपना ही वजूद, मिटाते चले गए! कागज़ के चंद टुकड़ों को, कमाते चले गए, रिश्तों की नाज़ुक डोर को, उलझाते चले गए! कल की इसी तलाश में हमने, सुकूं खो दिया, ख़ुद अपनी ही ख़ुशी को हम, जलाते चले गए!
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