तूफ़ान से लड़े थे तो सलामत रहे थे हम,
कश्ती को बचाते हुए साहिल पे बिखर गए।

रोका था बहुत दिल ने कि मुड़ कर न देखना,
हम फिर भी तेरी याद की गलियों से गुज़र गए।

दावा तो बहुत था कि उन्हें भूल जाएँगे,
आवाज़ सुनी उनकी तो रस्ते में ठहर गए।

पलकों पे सजाया था जिन्हें हमने ख़्वाब सा,
वो आँसू की तरह मेरी आँखों से उतर गए।

मिलने की क़सम खाई थी उसने ही बार-बार,
जब आई घड़ी पास तो बातों से मुकर गए।

#shayari
#poetry
तूफ़ान से लड़े थे तो सलामत रहे थे हम, कश्ती को बचाते हुए साहिल पे बिखर गए। रोका था बहुत दिल ने कि मुड़ कर न देखना, हम फिर भी तेरी याद की गलियों से गुज़र गए। दावा तो बहुत था कि उन्हें भूल जाएँगे, आवाज़ सुनी उनकी तो रस्ते में ठहर गए। पलकों पे सजाया था जिन्हें हमने ख़्वाब सा, वो आँसू की तरह मेरी आँखों से उतर गए। मिलने की क़सम खाई थी उसने ही बार-बार, जब आई घड़ी पास तो बातों से मुकर गए। #shayari #poetry
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