मालूम हमें भी है वो अब लौट न आएगा,
पर ख़ुद से यही झूठ हम सौ बार करते हैं।

गिर कर तेरे क़दमों में तो हम रो नहीं सकते,
हम इश्क़ में भी ख़ुद को बड़ा ख़ुद्दार करते हैं।

चाहत तो मेरी आँखों से छुपती ही नहीं है,
होंठों से मगर आज भी इंकार करते हैं।

सीने में छुपे ज़ख़्म दिखाते नहीं सबको,
हम ख़ुद को ही अंदर से यूँ बीमार करते हैं।

#shayari
#ghazal
मालूम हमें भी है वो अब लौट न आएगा, पर ख़ुद से यही झूठ हम सौ बार करते हैं। गिर कर तेरे क़दमों में तो हम रो नहीं सकते, हम इश्क़ में भी ख़ुद को बड़ा ख़ुद्दार करते हैं। चाहत तो मेरी आँखों से छुपती ही नहीं है, होंठों से मगर आज भी इंकार करते हैं। सीने में छुपे ज़ख़्म दिखाते नहीं सबको, हम ख़ुद को ही अंदर से यूँ बीमार करते हैं। #shayari #ghazal
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