यहाँ सब किराएदार हैं, मकान किसका है?
साँसों की मोहलत पर, गुमान किसका है?
जब जाना है खाली हाथ, तो फिर ये भार क्यों?
माथे पर शिकन और दिल में दरार क्यों?

जीवन तो एक कला है, इसे सादगी से सजाओ,
हर दर्द को गले लगाओ, और बस मुस्कुराओ।

#Shayari
यहाँ सब किराएदार हैं, मकान किसका है? साँसों की मोहलत पर, गुमान किसका है? जब जाना है खाली हाथ, तो फिर ये भार क्यों? माथे पर शिकन और दिल में दरार क्यों? जीवन तो एक कला है, इसे सादगी से सजाओ, हर दर्द को गले लगाओ, और बस मुस्कुराओ। #Shayari
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