ज़िंदगी की किताब के पन्ने,
सारे कहाँ रंगीन होते हैं?
कुछ फटे हुए, कुछ मुड़े हुए,
कुछ आँसुओं से नमकीन होते हैं।
पर जो खारे पानी में भी,
मीठा सा रस घोल दे...
जो खामोश रहकर भी,
हँसकर सब कुछ बोल दे...
वही तो बाज़ीगर है, वही तो सिकंदर है।
#Shayari
सारे कहाँ रंगीन होते हैं?
कुछ फटे हुए, कुछ मुड़े हुए,
कुछ आँसुओं से नमकीन होते हैं।
पर जो खारे पानी में भी,
मीठा सा रस घोल दे...
जो खामोश रहकर भी,
हँसकर सब कुछ बोल दे...
वही तो बाज़ीगर है, वही तो सिकंदर है।
#Shayari
ज़िंदगी की किताब के पन्ने,
सारे कहाँ रंगीन होते हैं?
कुछ फटे हुए, कुछ मुड़े हुए,
कुछ आँसुओं से नमकीन होते हैं।
पर जो खारे पानी में भी,
मीठा सा रस घोल दे...
जो खामोश रहकर भी,
हँसकर सब कुछ बोल दे...
वही तो बाज़ीगर है, वही तो सिकंदर है।
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