वक़्त तो निकल जाएगा, मसला यादों का है…
ये जो दिल में ठहर गई हैं, ये सिलसिला बातों का है…
कुछ लम्हे धूप बनकर अब भी मन में उतरते हैं,
कुछ साया तेरी खामोश मुलाक़ातों का है…
ये जो दिल में ठहर गई हैं, ये सिलसिला बातों का है…
कुछ लम्हे धूप बनकर अब भी मन में उतरते हैं,
कुछ साया तेरी खामोश मुलाक़ातों का है…
वक़्त तो निकल जाएगा, मसला यादों का है…
ये जो दिल में ठहर गई हैं, ये सिलसिला बातों का है…
कुछ लम्हे धूप बनकर अब भी मन में उतरते हैं,
कुछ साया तेरी खामोश मुलाक़ातों का है…
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