मैं वक़्त की उँगलियों से फिसलता सा लम्हा हूँ..
रुकना चाहूँ भी तो ठहर नहीं सकता।
#TwoLiners #Poetry #Shayari
रुकना चाहूँ भी तो ठहर नहीं सकता।
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मैं वक़्त की उँगलियों से फिसलता सा लम्हा हूँ..
रुकना चाहूँ भी तो ठहर नहीं सकता।
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