Chitthi Na Koi Sandesh Lyrics – Full Hindi Ghazal Lyrics & Emotional Song
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Chitthi Na Koi Sandesh Lyrics
“चिट्ठी ना कोई संदेस” एक बेहद भावुक ग़ज़ल है जो जुदाई, यादों और इंतज़ार की पीड़ा को बेहद सादगी से बयान करती है। यह गीत उन भावनाओं को छूता है जो किसी अपने के दूर चले जाने के बाद दिल में रह जाती हैं।
नीचे इस ग़ज़ल के पूरे बोल पढ़ें।
Original Lyrics
चिठ्ठी ना कोइ संदेस जाने वो कौन सा देस
जहां तुम चले गए..
चिठ्ठी ना कोइ संदेस जाने वो कौन सा देस
जहां तुम चले गए..
जहां.... तुम चले गए..
इस दिल पे लगा के ठेंस जाने वो कौन सा देस
जहां तुम चले गए..
एक आह भरी होगी, हम ने ना सूनी होगी.
जाते जाते तुम ने, आवाज तो दी होगी.
हर वक्त यही हैं गम, उस वक्त कहा थे हम.
कहा तुम चले गए..
चिठ्ठी ना कोइ संदेस जाने वो कौन सा देस
जहां तुम चले गए..
जहां.... तुम चले गए..
इस दिल पे लगा के ठेंस जाने वो कौन सा देस
जहां तुम चले गए..
हर चीज पे अश्कों से, लिखा हैं तुम्हारा नाम.
ये रस्ते घर गलीयाँ, तुम्हें कर ना सके सलाम.
हाय दिल में रह गयी बात, जल्दी से छुडाकर हाथ.
कहा तुम चले गए..
चिठ्ठी ना कोइ संदेस जाने वो कौन सा देस
जहां तुम चले गए..
जहां.... तुम चले गए..
इस दिल पे लगा के ठेंस जाने वो कौन सा देस
जहां तुम चले गए..
हां.हां.हां.हां.हां.हां.हां.हां...
अब यादों के कांटे, इस दिल में चुभते हैं.
ना दर्द ठहेंरता हैं, ना आंसू रुकते हैं.
तुम्हें ढूंढ रहा हैं प्यार, हम कैसे करे इकरार के हां तुम चले गए..
चिठ्ठी ना कोइ संदेस जाने वो कौन सा देस
जहां तुम चले गए..
जहां.... तुम चले गए..
इस दिल पे लगा के ठेंस जाने वो कौन सा देस
जहां तुम चले गए..
हो... कहां तुम चले गए...
हो.. कहां तुम चले गए....
हो. कहां तुम चले गए.....
Original Song Video
यहाँ इस मशहूर ग़ज़ल का वीडियो देख सकते हैं:
Tribute / Inspired Lyrics
आहट सी कोई अब भी, आँगन में सुनाई दे
तू पास नहीं फिर भी, हर ओर दिखाई दे
ये कैसा है दस्तूर, किस्मत से हुए मजबूर
कहाँ तुम चले गये
चिट्ठी ना कोई संदेस, जाने वो कौन सा देस
जहाँ तुम चले गये
जहाँ तुम चले गये
इस दिल पे लगा के ठेस, जाने वो कौन सा देस
जहाँ तुम चले गये
सूनी हैं सभी राहें, वीरान है हर महफ़िल
दुनिया तो नज़र आए, पर गुम है मेरी मंज़िल
ये साँस थमी सी है, बस तेरी कमी सी है
कहाँ तुम चले गये
चिट्ठी ना कोई संदेस, जाने वो कौन सा देस
जहाँ तुम चले गये
जहाँ तुम चले गये
इस दिल पे लगा के ठेस, जाने वो कौन सा देस
जहाँ तुम चले गये
वो प्यार की बातें थीं, वो साथ के मंज़र थे
पर हाथ में अब मेरे, यादों के समंदर हैं
ये कैसी है तक़दीर, धुंधली हुई हर तस्वीर
कहाँ तुम चले गये
चिट्ठी ना कोई संदेस, जाने वो कौन सा देस
जहाँ तुम चले गये
जहाँ तुम चले गये
इस दिल पे लगा के ठेस, जाने वो कौन सा देस
जहाँ तुम चले गये
Tribute Video
इन पंक्तियों की वीडियो प्रस्तुति यहाँ देख सकते हैं:
“चिट्ठी ना कोई संदेस” जैसी ग़ज़लें सिर्फ़ गीत नहीं होतीं, बल्कि दिल की उन भावनाओं का आईना होती हैं जिन्हें शब्दों में कहना आसान नहीं होता। जुदाई, यादें और इंतज़ार – यही इस ग़ज़ल की आत्मा है।
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