यूँ तो हर दर्द से रिश्ता है पुराना मेरा,
कोई ताज़ा-सा गिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी।
मैं जो ख़ामोश हूँ पत्थर नहीं हूँ फिर भी,
कोई एहसास जगा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी।
मैं जो सहता रहा हर वार हँस कर अब तलक,
कोई सीने पे चला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी।
यूँ तो आदत है मुझे टूट के फिर जुड़ने की,
कोई दरारें ही बढ़ा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी।
#TwoLiners #Shayari
कोई ताज़ा-सा गिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी।
मैं जो ख़ामोश हूँ पत्थर नहीं हूँ फिर भी,
कोई एहसास जगा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी।
मैं जो सहता रहा हर वार हँस कर अब तलक,
कोई सीने पे चला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी।
यूँ तो आदत है मुझे टूट के फिर जुड़ने की,
कोई दरारें ही बढ़ा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी।
#TwoLiners #Shayari
यूँ तो हर दर्द से रिश्ता है पुराना मेरा,
कोई ताज़ा-सा गिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी।
मैं जो ख़ामोश हूँ पत्थर नहीं हूँ फिर भी,
कोई एहसास जगा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी।
मैं जो सहता रहा हर वार हँस कर अब तलक,
कोई सीने पे चला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी।
यूँ तो आदत है मुझे टूट के फिर जुड़ने की,
कोई दरारें ही बढ़ा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी।
#TwoLiners #Shayari
0 Comments
·0 Shares
·26 Views
·0 Reviews