-
मैं वक़्त की उँगलियों से फिसलता सा लम्हा हूँ..
रुकना चाहूँ भी तो ठहर नहीं सकता।
#TwoLiners #Poetry #Shayariमैं वक़्त की उँगलियों से फिसलता सा लम्हा हूँ.. रुकना चाहूँ भी तो ठहर नहीं सकता। #TwoLiners #Poetry #Shayari0 Kommentare ·0 Geteilt ·2 Ansichten ·0 Bewertungen -
रात तो क़ायदे में है, वक़्त पर चली आती है.. नींद मगर जाने किस सफ़र पर है। #TwoLiners0 Kommentare ·0 Geteilt ·2 Ansichten ·0 Bewertungen
Mehr Storys